सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शराब समाज के लिए घातक

दोस्तों मैं देख रहा हूँ कि सभी राज्यों में शराब के कारण समाज दूषित हो रहा है और घर के अन्दर व बाहर महिलाएं हिंसा की शिकार हो रही हैं। एक तरफ लगभग सभी राज्यों की सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को पचास फीसद आरक्षण दे दिया तो दूसरी तरफ प्रत्येक पंचायत में शराब की दुकान खोलने का लाइसेंस दे दिया। इस कारण गांवों की स्थिति बदतर होती जा रही है। शराब के कारण बिहार में 37.2 फीसद शादीशुदा महिलाएं अपने पति 
द्वारा प्रताडि़त हो रही हैं।सरकार शराब को राजस्व उगाही का मुख्य स्त्रोत बना रही है। यह महिलाओं को जीते जी नरक में ढकेलने जैसा है। केन्द्र सरकार को अपनी शराब नीति पर पुर्नविचार करना चाहिए।और राज्यों को इस दिशा में निर्देश जारी करनी चाहिए | गांव- गांव शराब दुकान खोलकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल- कालेजों के पास शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।..इस समस्या पर कारगर कदम उठाने की जरुरत है ...| मित्रों आप सब की क्या राय है ????

आम आवाज़ विकल्प सोशल मीडिया

स्विज़रलैंड मे यह व्यवस्था है की अगर आप कही कोई जुर्म होते या क़ानून टूटते हुए देख रहे है तो आप उस दृश्य को अपने मोबाइल के कैमरे मे कैद कर एक ख़ास वेबसाइट पर डाल सकते है जहाँ से सरकार उस पर कार्येवाही कर सकती है, इसके प्रभाव का आंकलन इस बात से किया जा सकता है की वहां कोई "च्वीन्ग्म" तक खा के नहीं थूकता! आज हिन्दुस्तान मे हर किसी के पास मोबाइल फ़ोन की सुविधा है, इन्टरनेट तक पहुँच भी आसान है तो हमारे देश मे इस विकल्प को क्यों नहीं अपनाया जा रहा! मै यह नहीं कह रहा की हम इस तरह के विकल्प से अन्भिग्ये है क्योंकि फेसबुक पर ट्रेफिक पुलिस द्वारा इस तरह की शुरुवात पहले ही की जा चुकी है और आज एक लाख से भी ज्यादा लोग इस से जुड़े हुए है और इसके द्वारा जो भी कर्येवाही अभी तक की गयी है उसमे ज्यादा श्र्ये जनता को ही जाता है, लोगो ने गलत नंबर प्लेट वाली गाडियों की तस्वीरे इस प्रष्ट पर डाली और गैर सरकारी वाहनों पर लगी लाल बतियों की तस्वीरे भी इस प्रष्ट पर डाली और नतीजा ऐसा था जिसकी कल्पना कम ही की जाती है की कई रसूख वाले लोगो को भी कानून के आगे झुकना ही पड़ा! पर इसको सिर्फ उदाहरण के तौर पर…