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August, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जेपी और अन्ना आन्दोलन में फर्क

लोकनायक जयप्रकाश नारायण ईमानदार थे, और अन्ना हजारे की छवि भी ईमानदार है। परन्तु, दोनों आंदोलनों में बड़ा फर्क है। जेपी का आंदोलन संपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन के लिए था, जबकि अन्ना का एक सूत्री मुद्दा भ्रष्टाचार है। वैसे, भ्रष्टाचार का विरोध भी जेपी आंदोलन का एक हिस्सा था। भ्रष्टाचार के सभी पहलुओं-सामाजिक, आर्थिक, नैतिक आदि, पर उस आंदोलन में जोर रहा। जेपी का जीवन राजनीतिक, सामाजिक एवं 42 के आंदोलन के अनुभवों से जुड़ा रहा। उनका कैनवास बहुत बड़ा था। प्रधानमंत्री के कद के सामने उनका व्यक्तित्व किसी तरह कम नहीं था। जेपी संसदीय व्यवस्था में बहुत जोर देते थे। पूरे आंदोलन के दौरान उन्होंने संसदीय व्यवस्था को और मजबूती प्रदान करने का ही काम किया। बड़ी बात तो यह है उनका आंदोलन किसी ब्लू-प्रिंट पर आधारित नहीं था। जेपी आंदोलन खुद परिस्थिति के मुताबिक अपनी धारा तय करता रहा। जेपी के साथ भीड़ नहीं थी। उनके साथ प्रतिबद्ध लोग थे।

उनके अनुसार बड़ी संख्या से किसी आंदोलन में क्षणिक लाभ लाभ हो सकता है, परन्तु जज्बात को समाप्त होने में देर भी नहीं लगती। भीड़ दिशा नहीं तय कर सकती। प्रतिबद्ध कार्यकर्ता ही इस काम में स…

बांटो और राज करो !!!!!!!!!!!!!!

कांग्रेस शायद सोच रही है कि भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम को विभाजित कर और लोकपाल बिल के अपने प्रारूप को सदन में पेश कर उसने भ्रष्टाचार विरोधी माहौल की हवा निकाल दी है। लेकिन उसकी यह खतरनाक चाल दीर्घावधि में उसी को नुकसान पहुंचाएगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की विश्वसनीयता खंडित करने के लिए उसने कई चालें चलीं। सिविल सोसाइटी की वैधता को उसने इस आधार पर चुनौती दी कि नागरिक समाज के ये स्वयंभू प्रतिनिधि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को कमजोर कर रहे हैं। भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के प्रमुख नेताओं प्रशांत भूषण, शांति भूषण और अरविंद केजरीवाल के व्यक्तिगत साख को उसने जहां चुनौती दी, वहीं बाबा रामदेव को अर्द्धसत्य और अतिशयोक्तिपूर्ण बयान के आधार पर कमजोर करने की कोशिश की। इसका संदेश यह निकलता है कि अगर सभी चोर हैं, तो जांचे-परखे हुए कांग्रेसी चोरों का ही साथ देना चाहिए।

भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को धर्मनिरपेक्ष कांग्रेस के खिलाफ भाजपा और संघ द्वारा प्रेरित सांप्रदायिक साजिश के रूप में पेश कर और राष्ट्र विरोधी बताकर चुनौती दी गई। दिग्विजय सिंह, जयंती नटराजन और मनीष तिवारी जैसे कांग्रेस के निष्ठावान…