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January, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

युवा जग रहे है ?

उत्तर प्रदेश के कुछ विश्वविद्यालयों में समाजवादी युवजन सभा और एबीवीपी ने जिस तरीके से कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का विरोध किया, उसे सही नहीं ठहराया जा सकता। जनतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सब को है, लेकिन इस नाम पर अराजकता फैलाना गलत है।

वैसे यूपी में राहुल गांधी के प्रति छात्र संगठनों का यह रवैया पहली बार देखा जा रहा है। किसी भी छात्र संगठन ने उनका इस तरह से उग्र विरोध करने का साहस पहले नहीं दिखाया था। तो क्या यह माना जाए कि राहुल गांधी की लोकप्रियता का ग्राफ कुछ गिरा है? संभव है युवाओं के मन में राहुल के प्रति पैदा हो रहे असंतोष ने ही इन छात्र संगठनों का हौसला बढ़ाया हो।

दरअसल राहुल अब उस दौर से आगे निकल आए हैं, जब वह एक शो-पीस की तरह देखे जाते थे। युवा उन्हें सुनने से ज्यादा देखने में रुचि दिखाते थे। राहुल उनके लिए राजनेता से ज्यादा एक मॉडल थे, इसलिए उनकी सियासी बातों को बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता था। लेकिन धीरे-धीरे राहुल ने राजनीति की जमीन पर अपने पैर मजबूती से जमा लिए हैं। उनकी पार्टी ने भी उन पर पहले से ज्यादा भरोसा करना शुरू कर दिया है और अब वह कांग्रेस का चेहरा ब…

पर्यावरण के बहाने उद्योगों को न आने देने की साजिश

नयी औद्योगिक इकाइयों को बिहार में लाने के उद्देश्य से सरकार के सकारात्मक पहल पर बड़ी संख्या में उद्यमियों ने बिहार का रुख किया है। पर बिहार में उद्यमियों के आने की तैयारी माफिया तत्वों को बर्दाश्त नहीं हो रही है। उनके सिंडिकेट ने काफी तेज गति से मिथ्यापूर्ण व गलत हथकंडे अपनाकर बिहार आ रहे उद्यमियों की राह में रोड़ा अटकाना शुरू कर दिया है। हाल ही में एक मामला बिहार में सफेद एस्बेस्ट्स चादर की फैक्ट्री लगाने को आगे बढ़ी कंपनी बालमुकुंद सीमेंट का इस परिपेक्ष्य में सामने आया है।
पर्यावरण के बहाने इस कंपनी के खिलाफ माफिया तत्वों ने आंदोलन शुरू किया है। जबकि वास्तविक स्थिति यह है कि इस कंपनी को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के साथ-साथ राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की सहमति है। दरअसल बिहार में सफेद एस्बेस्ट्स की चादर का वार्षिक टर्नओवर 250 करोड़ रुपये का है। वर्तमान में इसकी आपूर्ति पश्चिम बंगाल और थोड़ी बहुत उप्र की कंपनियों द्वारा की जाती है। इन राज्यों में स्थित कंपनियों के संचालक यह नहीं चाहते कि इस क्षेत्र में उनका आधिपत्य यूं कहें एकाधिकार खत्म हो जाये। इस बात को ध्यान में रख इनके द्वारा इस क्षे…