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नक्सली नरसंहार,मूकदर्शक सरकार

हम अपने ही लोगों के खिलाफ युद्व नहीं छेड़ सकते। यह बात केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने नक्सलियों के लिए कही थी। परंतु,आज जब नक्सलियों ने अबतक के सबसे बड़े नरसंहार को अंजाम दिया,जिसमें 73 केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गये।
चिदंबरम ने इस घटना को आश्चर्यजनक और दुखद बताया।उन्होंने यह भी कहा कि नक्सलियों के इस खूनी खेल ने माओवादियों की निरदयता और उनकी बढ़ी हुई क्षमता को दरशाती है। नक्सलियों ने सरकार के ऑपरेशन ग्रीन हंट को एक नहीं दो नहीं तीन बार झटका दिया है।15 फरवरी को नक्सलियों ने बंगाल के मिदनापोर जिले में ईस्टर्न राइफल्स के 24 जवानों को मौत के घाट उतार दिया था।। अभी दो दिन पहले ही,नक्सलियों ने उड़ीसा के कोरापुट जिले में 11 सुरक्षा कर्मियों को लैंडमाइन धमाके में मार गिराया था। और आज दंतेवाड़ा जिले के मुकराना के जंगल में घात लगाकर किये गये हमले में 73 सीआरपीएफ जवानों के साथ खून की होली खेली है।यह हमला केंद्र सरकार के नक्सलियों के प्रति रवैये पर सवालिया निशान उठाते हैं। साथ ही साथ ऑपरेशन ग्रीन हंट की पोल भी खोलता है। और कितनी जानों के बाद यह सिलसिला थमेगा। बहुत हो गया। अब वक्त आ…

सरहद पार की शादियां आसान नहीं

भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा और पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक की शादी को लेकर मचे बवाल ने सरहद पार होने वाली शादियों की सफलता पर फिर बहस छेड़ दी है।
अमूमन दो देशों के लोगों के बीच हुई शादियां समस्याओं से घिरी रहती हैं और अगर बात भारत-पाकिस्तान की आती है तो उसमें जटिलताओं की आशंका और बढ़ जाती है। सरहद पार रिश्तों में अक्सर लड़कियों को ही समझौते करने पड़ते हैं।भले ही समाज बदल गया है, लेकिन अगर बात शादी की आती है तो कहीं न कहीं सामाजिक दायरे अब भी आड़े आते हैं। दो देशों के बीच शादियों में बाद में कई जमीनी समस्याएं आती हैं।पहले भी कई बार भारत और पाकिस्तान के बीच की शादियां सुर्खियों में आई हैं, लेकिन हर बार वह समस्याओं के कारण ही आयी हैं। दोनों देशों के माहौल और समाज के नजरिए में जमीन-आसमान का अंतर है। ऐसे में भारत की लड़कियों और खास तौर पर सानिया मिर्जा जैसी खिलाड़ी को पाकिस्तान के कथित रूढ़िवादी माहौल में सामंजस्य बिठाने में खासी तकलीफ आ सकती है।