गुरुवार, 9 नवंबर 2017

संचार: महत्व एवं कार्य

संचार क्या है

सार्थक चिन्हों द्वारा सूचनाओं को आदान -प्रदान करने की प्रक्रिया संचार है। किसी सूचना या जानकारी को दूसरों तक पहुंचाना संचार है। जब मनुष्य अपने हाव-भाव, संकेतों और वाणी के माध्यम से सूचनाओं का आदान प्रदान आपस में करता है तो वह संचार है। कम्यूनिकेशन अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसकी उत्पत्ति लैटिन भाषा के ``Communis´´ नामक शब्द से हुई है। इसका अर्थ समुदाय होता है। अर्थात भाईचारा, मैत्री, भाव, सहभागिता, आदि इसके अर्थ हो सकते है। इसलिए संचार का अर्थ एक-दूसरे को जानना, समझना, संबध बनाना, सूचनाओं का आदान प्रदान करना आदि है। इसके माध्यम से मनुष्य अपने विचारों, भावों, अनुभवों को एक दूसरे से बांटता है। वास्तव में विचारों की अभिव्यक्ति जिज्ञासाओं को परस्पर बांटना ही संचार का मुख्य उद्देश्य है।

संचार मनुष्यों के अलावा पशु पक्षियों में भी होता इसके लिए माध्यम का होना अति आवश्यक है। चिड़िया का चहचहाना, कुत्ते का भोंकना, सर्प का भुंकार मारना, शेर का दहाड़ना, गाय का रंभाना, मेंढ़क का टर-टर करना भी संचार है। भाषा ही संचार का पहला माध्यम है। भाषा के द्वारा ही हम अपने विचारों को समाज में आदान प्रदान करते है। इसीलिए कहा जा सकता है कि सूचनाओं, विचारों एवं भावनाओं को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक भाषा के माध्यम से ही अपने विचारों अनुभवों को समाज के सामने रख कर यथेष्ठ सूचना का प्रेषण करते है।

संचार मौखिक भी होता है और लिखित भी होता है। संचार का तीसरा चरण मुद्रण से संबध रखता है। और चौथे चरण को जनसंचार कहते है। वास्तव मे संचार एक प्रक्रिया है संदेश नहीं। इस प्रक्रिया में एक मनुष्य दूसरे मनुष्य से बातचीत करता है। अपने अनुभवों को बांटता है। संचार ने ही पूरी दुनिया को एक छोटे से गांव में तब्दील कर दिया है। अमेरिकी विद्वान पसिंग ने मानव संचार के छह घटक बताऐं है। 
संचार के तत्व

प्रेषक : संदेश भेजने वाला 

संदेश : विचार, अनुभव, सूचना

संकेतीकरण या इकोडिंग : विचार को संकेत चिन्ह में बदलना 

माध्यम : जिसके द्वारा संदेश भेजा जाता है

प्राप्तकर्ता : संदेश प्राप्त करने वाला

संकेतवाचन या डीकोडिंग : प्राप्तकर्ता संदेश को अपने मस्तिष्क में उसी अर्थ में ढ़ाल लेना
देश तथा विदेश में मनुष्य की दस्तकें बढ़ती है। इसलिए संचार-प्रक्रिया का पहला चरण प्रेषक होता है। इसको इनकोडिंग भी कहते है। एनकोडिंग के बाद विचार शब्दों, प्रतीकों, संकेतों एवं चिन्हों में बदल जाते है। इस प्रक्रिया के बाद विचार सार्थक संदेश के रूप में ढल जाता है। जब प्राप्तकर्ता अपने मस्तिष्क में उक्त संदेश को ढ़ाल लेता है तो संचार की भाषा में इसे डीकोडिंग कहते है। डीकोडिंग के बाद प्राप्तकर्ता अपनी प्रतिक्रिया भेजता है इस स्थिति को फीडबेक या प्रतिपुष्टि कहते है।

संचार की विशेषताऐं
संदेश का संप्रेषण एवं विश्लेषण करना।
संचार उद्देश्यपूर्ण होना चाहिए।
प्रभावी होने के साथ-साथ सार्थक भी होना चाहिए। दो व्यक्तियों में सार्थकता का निर्माण संप्रेषण से होता है।
संप्रेषक को पहले सूचना एवं तथ्य को हृदयंगम कर लेना चाहिए।


किसी संदेश के लिए पांच प्रश्नों का उत्तर पूछना अतिआवश्यक है:-
1. कौन कहता है?

2. क्या कहता है?

3. किस माध्यम से कहता है

4. किससे कहता है?

5. किस प्रभाव के साथ कहता है।


Communication (संचार) का अर्थ हैं सूचनाओ का आदान प्रदान करने से हैं | लेकिन ये सूचनाये तब तक उपयोगी नहीं हो सकती जब तक कि इन सूचनाओ का आदान प्रदान न हो | पहले सूचनाओ या सन्देश को एक स्थान से दुसरे स्थान पर भेजने में काफी समय लगता था | किन्तु वर्तमान में संदेशों का आदान प्रदान बहुत ही आसान हो गया हैं और समय भी कम लगता है सेटेलाइट व टेलीविजन ने तो सारी दुनिया को एक नगर में बदल दिया हैं |
जब दो या दो से अधिक व्यक्ति आपस में कुछ सार्थक चिह्नों, संकेतों या प्रतीकों के माध्यम से विचारों या भावनाओं का आदान-प्रदान करते हैं तो उसे संचार कहते हैं।
“Communication refers to the act by one or more persons of sending and receiving messages – distorted by noise-with some effect and some opportunity for feedback”
Use of Communication and IT (Information Technology):-
हमारे पास कम्युनिकेशन के सबसे प्रबल माध्यम में हमारी आवाज और भाषा है और इसके वाहक के रूप में पत्र, टेलीफोन, फैक्स, टेलीग्राम, मोबाइल तथा इन्टरनेट इत्यादि हैं | कम्युनिकेशन का उद्देश्य संदेशो तथा विचारो का आदान प्रदान है| सम्पूर्ण मानव सभ्यता इसी कम्युनिकेशन पर आधारित है तथा इस कम्युनिकेशन को तेज व सरल बनाने के लिए सूचना प्रोद्योगिकी का जन्म हुआ| कंप्यूटर, मोबाइल, इन्टरनेट सबका अविष्कार इसी कम्युनिकेशन के लिए हुआ इन्टरनेट एक ऐसा सशक्त माध्यम है जिसके द्वारा हम पूरी दुनिया में कही भी व किसी भी समय कम से कम समय व कम से कम खर्च में सूचनाओ व विचारो का आदान प्रदान कर सकते हैं|
Communication Process (संचार प्रक्रिया)
कम्युनिकेशन का मुख्य उद्देश्य डाटा व सूचनाओ का आदान प्रदान करना होता है| डाटा कम्युनिकेशन से तात्पर्य दो समान या विभिन्न डिवाइसों के मध्य डाटा का आदान प्रदान से है अर्थात कम्युनिकेशन करने के लिए हमारे पास समान डिवाइस होना आवश्यक है | डाटा कम्युनिकेशन के प्रभाव को तीन मुख्य विशेषताओ द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है|
  1. डिलीवरी (Delivery) – डिलीवरी से तात्पर्य डाटा को एक जगह से दुसरे जगह प्राप्त कराने से है|
  2. शुद्धता (Accuracy) – यह डाटा की गुणवत्ता या डाटा के सही होने को दर्शाता है|
  3. समयबधता (Timeliness) – यह गुण डाटा के निश्चय समय में डिलीवर होने को दर्शाता है|
किसी कम्युनिकेशन प्रोसेस (प्रक्रिया) में पाँच घटक जुड़े होते हैं|
  • संदेश (Message)
  • प्रेषक (Sender)
  • माध्यम (Medium)
  • प्राप्तकर्ता (Receiver)
  • प्रोटोकॉल (Protocol)

विभिन्न विद्वानों द्वारा दी गई संचार की परिभाषा
संचार एक शक्ति है जिसमें एक एकाको संप्रेषण दूसरे व्यक्तियो को व्यवहार बदलने हेतु प्रेरित करता है।
-
हावलैंड
वाणी, लेखन या संकेतों के द्वारा विचारों अभिमतों अथवा सूचना का विनिमय करना संचार कहलाता है।
-
रॉबर्ट एंडरसन
संचार एक पक्रिया है जिसमें सामाजिक व्यवस्था के द्वारा सूचना, निर्णय और निर्देश दिए जाते है और यह एक मार्ग है जिसमें ज्ञान, विचारों और दृष्टिकोणों को निर्मित अथवा परिवर्तित किया जाता है।
-
लूमिक और बीगल
संचार समानूभूति की प्रक्रिया या श्रृंखला है जो कि एक संस्था के सदस्यों को उपर से नीचे तक और नीचे से उपर तक जोड़ती है।
-
मैगीनसन
संचार के कार्य (Functions of Communication)

       21वीं शताब्दी का मानव संचार माध्यमों से घिरा हुआ है। इसके अभाव में न तो कोई व्यक्ति, समूह व समाज प्रगति कर सकता है और न तो मानव जीवन में जीवान्तता  आ सकती है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए लार्ड मैकाले ने संचार को 'चौथीसत्ता' का नाम दिया। संचार के कार्यो को उनकी प्रकृति के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहला, प्राथमिक कार्य- जिसके अंतर्गत सूचना देना, शिक्षित करना, निर्देशित करना दूसरा, द्वितीयक कार्य- जिसके अंतर्गत विचार विमर्श, संगोष्ठी, सेमीनार, परिचर्चा, वार्तालॉप इत्यादि आते हैं । संचार विशेषज्ञ हैराल्ड लॉसवेल ने संचार के तीन प्रमुख कार्य बतलाया है।  
1. सूचना संग्रह एवं प्रसार,
2. समाज व परिवेश के विभिन्न अंगों से सम्बन्ध स्थापित करना, और
3. सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित करना। 

    
(1) सूचित करना : एक जमाना था, जब कहा जाता था- Knowledge is Power (ज्ञान ही शक्ति है), लेकिन आज कहा जाता है- The Information is Power (सूचना ही शक्ति है)।  दूसरे शब्दों में, जिसके पास नवीनतम और अधिकतम सूचना होगी, वह सबसे अधिक ताकतवर होगा। आधुनिक युग में सूचना एक शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है, जिस व्यक्ति या समाज या राष्ट्र के पास जितनी अधिक सूचना होती है, उसे उतना ही अधिक शक्तिशाली माना जाता है। उतना ही अधिक प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। मानव अपने जिज्ञासु स्वभाव के कारण पास-पड़ोस और देश-दुनिया की ताजातरीन घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं को जानने के लिए सदैव तत्पर रहता है। सूचनाओं के अभाव में स्वयं को समाज से कटा हुआ महसूस करता है। आधुनिक युग में संचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है। इस कार्य को समाचार पत्र, पत्रिका, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, ई-मेल, इंटरनेट, टेलीफोन, मोबाइल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, यू-ट्यूब, वेब पोर्टल्स इत्यादि के माध्यम से किया जा रहा है।  

(2) शिक्षित करना : संचार का दूसरा प्रमुख कार्य शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर समाज के लोगों को शिक्षित करना है। शिक्षा ने विज्ञान को जन्म दिया है और विज्ञान ने संचार माध्यमों को। अब संचार माध्यम शिक्षा और विज्ञान दोनों के प्रचार व प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं। समाज को शिक्षित करने का उद्देश्य मात्र पढऩा-लिखना नहीं है, बल्कि देश व समाज में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देकर उपयोग करने योङ्गय बनाना है। शिक्षा से मानव का बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण होता है। मानव जीवन में कलात्मकता का सूत्रपात होता है। अपने अनुभवों के आदान-प्रदान से मानव बहुत कुछ सीखने का प्रयत्न करता है। अनुभवों का उद्भव अनौपचारिक संचार से होता है, जिसमें औपचारिक शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कथन है कि, संचार माध्यमों द्वारा शिक्षा का जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, देश व समाज उतना ही अधिक सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और नैतिक विकास की दृष्टि से समृद्धशाली होगा। आजकल टेलीविजन व रेडियो पर NCERT और IGNOU के अनेक शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा है। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं व वेबसाइटों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अत: लोगों का शिक्षित करना संचार का प्रमुख कार्य है।  

(3) मनोरंजन करना : संचार माध्यमों का तीसरा प्रमुख कार्य लोगों का मनोरंजन करना है। मनोरंजन में मानव जीवन की नीरसता को तोडऩे, चिंता व तनाव से ध्यान हटाने तथा ताजगी भरने की क्षमता होती है। यहीं कारण है कि संचार माध्यमों की मदद से कार्टून, लेख, संगीत, कविता, नाटक इत्यादि का प्रसारण/प्रकाशन किया जाता है। वर्तमान समय में सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, इंटरनेट जैसे माध्यम लोगों के समक्ष मनोरंजनात्मक सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं। मनोरंजन लोगों की भावना व संवेदनशीलता से जुड़ा है, क्योंकि अपने दैनिक जीवन में लोग सिनेमा कलाकारों का अनुसरण करते हैं। मनोरंजन के माध्यमों से लोगों को पास-पड़ोस के परिवेश, संस्कृति, फैशन इत्यादि के बारे में जानने, समझने व सीखने का मौका मिलता है। संचार माध्यम समाज में अलग-अलग स्थानों पर बिखरे किन्तु एक ही प्रकृति के लोगों को मनोरंजन के माध्यम से जोड़ता है तथा आनंद की अनुभूति कराता है। सन् 1990 के दशक में टेलीविजन तथा सन् 2000 के दशक में एफएम रेडियो ने बेडरूम में घुसपैठ की तथा मनोरंजनात्मक कार्यक्रमों का प्रसारण कर लोगों को अपने मोह जाल में फंसा लिया। 

      आधुनिक युग में सूचना और मनोरंजन परस्पर एक दूसरे के निकट आ गये हैं। इसका उदाहरण है, समाचार पत्रों में कार्टून तथा टीवी चैनलों पर एनीमेशन के साथ समाचारों का प्रकाशन व प्रसारण। इनके मिश्रण से एक नया शब्द बना है-'इन्फोटेन्मेंट' अर्थात् ऐसी सामग्री जिसमें 'इनर्फोमेशन' (सूचना) भी हो और 'इंटरनेटमेंट' (मनोरंजन) भी।

अन्य कार्य : संचार के अन्य प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं :-

    (A) मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करना,
    (B) भावनात्मक स्तर पर तुष्टिकरण का उपाय करना,
    (C) पर्यावरण संरक्षण के प्रति सदैव तत्पर रहना,
    (D) नवाचार के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करना,
    (E) निरसता को दूर कर बदलाव के लिए प्रेरित करना,
    (F) विभिन्न सामाजिक घटकों पर निगरानी रखना, और
    (G) सामाजिक उन्नयन के लिए प्रयत्नशील रहना।

    उपरोक्त आधार पर कहा जा सकता है कि संचार एक ऐसा वरदान है, जिसका उपयोग कर मानव ने अपने बौद्धिक कौशल को विकसित करने और अपने बुद्धि व परिश्रम के बल पर बेहतर जीवन बनाने का प्रयास किया है। इसीलिए मानव को अन्य जीवधारियों में श्रेष्ठ माना जाता है।

संचार साधनो का महत्त्वमहत्त्व-
१- संचार के साधनों में दूरदर्शन एव रेडियो से लोगो का मनोरंजन होता है । इससे लोग शिक्षा ग्रहण करते है।
२- संचार साधन लोगो को जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
३- संचार के साधन पिछड़े क्षेत्रो के विकास में मददगार होता है।
४- संचार के साधनों में उपग्रह सेवाओं से मौसम संबंधी जानकारी हो जाती है जिससे यातायात एव कृषि में होनेवाले क्षति कम हो गयी है।
५- संचार माध्यम लोगो को वैज्ञानिक तकनीक का शिक्षा देता है।
६- संचारों साधन राष्ट्रीय एकता में सहायक होते है।
७- संचार साधन देशो की अर्थब्यवस्था को मजबूती प्रदान करते है।
८- संचार साधनो द्वारा विचारो का आदान प्रदान भी आसान हो गया है।
भारत में तीन प्रकार के संचार सेवाएं
है
१- डाक- तार सेवाएं
२- इलेक्ट्रानिक माध्यम या जनसंचार
३- मुद्रण माध्यम

संचार के कार्य (Functions of Communication)

संचार के कार्य (Functions of Communication)


       21वीं शताब्दी का मानव संचार माध्यमों से घिरा हुआ है। इसके अभाव में न तो कोई व्यक्ति, समूह व समाज प्रगति कर सकता है और न तो मानव जीवन में जीवान्तता  आ सकती है। इसकी उपयोगिता को देखते हुए लार्ड मैकाले ने संचार को 'चौथीसत्ता' का नाम दिया। संचार के कार्यो को उनकी प्रकृति के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। पहला, प्राथमिक कार्य- जिसके अंतर्गत सूचना देना, शिक्षित करना, निर्देशित करना दूसरा, द्वितीयक कार्य- जिसके अंतर्गत विचार विमर्श, संगोष्ठी, सेमीनार, परिचर्चा, वार्तालॉप इत्यादि आते हैं । संचार विशेषज्ञ हैराल्ड लॉसवेल ने संचार के तीन प्रमुख कार्य बतलाया है।  
1. सूचना संग्रह एवं प्रसार,
2. समाज व परिवेश के विभिन्न अंगों से सम्बन्ध स्थापित करना, और
3. सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित करना। 

    
(1) सूचित करना : एक जमाना था, जब कहा जाता था- Knowledge is Power (ज्ञान ही शक्ति है), लेकिन आज कहा जाता है- The Information is Power (सूचना ही शक्ति है)।  दूसरे शब्दों में, जिसके पास नवीनतम और अधिकतम सूचना होगी, वह सबसे अधिक ताकतवर होगा। आधुनिक युग में सूचना एक शक्तिशाली हथियार बनकर उभरा है, जिस व्यक्ति या समाज या राष्ट्र के पास जितनी अधिक सूचना होती है, उसे उतना ही अधिक शक्तिशाली माना जाता है। उतना ही अधिक प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। मानव अपने जिज्ञासु स्वभाव के कारण पास-पड़ोस और देश-दुनिया की ताजातरीन घटनाओं से जुड़ी सूचनाओं को जानने के लिए सदैव तत्पर रहता है। सूचनाओं के अभाव में स्वयं को समाज से कटा हुआ महसूस करता है। आधुनिक युग में संचार माध्यमों का प्रमुख कार्य सूचना देना है। इस कार्य को समाचार पत्र, पत्रिका, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, ई-मेल, इंटरनेट, टेलीफोन, मोबाइल, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, यू-ट्यूब, वेब पोर्टल्स इत्यादि के माध्यम से किया जा रहा है।  

(2) शिक्षित करना : संचार का दूसरा प्रमुख कार्य शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर समाज के लोगों को शिक्षित करना है। शिक्षा ने विज्ञान को जन्म दिया है और विज्ञान ने संचार माध्यमों को। अब संचार माध्यम शिक्षा और विज्ञान दोनों के प्रचार व प्रसार में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं। समाज को शिक्षित करने का उद्देश्य मात्र पढऩा-लिखना नहीं है, बल्कि देश व समाज में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी देकर उपयोग करने योङ्गय बनाना है। शिक्षा से मानव का बौद्धिक विकास व चरित्र निर्माण होता है। मानव जीवन में कलात्मकता का सूत्रपात होता है। अपने अनुभवों के आदान-प्रदान से मानव बहुत कुछ सीखने का प्रयत्न करता है। अनुभवों का उद्भव अनौपचारिक संचार से होता है, जिसमें औपचारिक शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कथन है कि, संचार माध्यमों द्वारा शिक्षा का जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा, देश व समाज उतना ही अधिक सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और नैतिक विकास की दृष्टि से समृद्धशाली होगा। आजकल टेलीविजन व रेडियो पर NCERT और IGNOU के अनेक शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण हो रहा है। समाचार पत्रों, पत्रिकाओं व वेबसाइटों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। अत: लोगों का शिक्षित करना संचार का प्रमुख कार्य है।  

(3) मनोरंजन करना : संचार माध्यमों का तीसरा प्रमुख कार्य लोगों का मनोरंजन करना है। मनोरंजन में मानव जीवन की नीरसता को तोडऩे, चिंता व तनाव से ध्यान हटाने तथा ताजगी भरने की क्षमता होती है। यहीं कारण है कि संचार माध्यमों की मदद से कार्टून, लेख, संगीत, कविता, नाटक इत्यादि का प्रसारण/प्रकाशन किया जाता है। वर्तमान समय में सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन, कम्प्यूटर, इंटरनेट जैसे माध्यम लोगों के समक्ष मनोरंजनात्मक सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं। मनोरंजन लोगों की भावना व संवेदनशीलता से जुड़ा है, क्योंकि अपने दैनिक जीवन में लोग सिनेमा कलाकारों का अनुसरण करते हैं। मनोरंजन के माध्यमों से लोगों को पास-पड़ोस के परिवेश, संस्कृति, फैशन इत्यादि के बारे में जानने, समझने व सीखने का मौका मिलता है। संचार माध्यम समाज में अलग-अलग स्थानों पर बिखरे किन्तु एक ही प्रकृति के लोगों को मनोरंजन के माध्यम से जोड़ता है तथा आनंद की अनुभूति कराता है। सन् 1990 के दशक में टेलीविजन तथा सन् 2000 के दशक में एफएम रेडियो ने बेडरूम में घुसपैठ की तथा मनोरंजनात्मक कार्यक्रमों का प्रसारण कर लोगों को अपने मोह जाल में फंसा लिया। 

      आधुनिक युग में सूचना और मनोरंजन परस्पर एक दूसरे के निकट आ गये हैं। इसका उदाहरण है, समाचार पत्रों में कार्टून तथा टीवी चैनलों पर एनीमेशन के साथ समाचारों का प्रकाशन व प्रसारण। इनके मिश्रण से एक नया शब्द बना है-'इन्फोटेन्मेंट' अर्थात् ऐसी सामग्री जिसमें 'इनर्फोमेशन' (सूचना) भी हो और 'इंटरनेटमेंट' (मनोरंजन) भी।

अन्य कार्य : संचार के अन्य प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं :-

    (A) मानवीय संवेदनाओं को व्यक्त करना,
    (B) भावनात्मक स्तर पर तुष्टिकरण का उपाय करना,
    (C) पर्यावरण संरक्षण के प्रति सदैव तत्पर रहना,
    (D) नवाचार के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करना,
    (E) निरसता को दूर कर बदलाव के लिए प्रेरित करना,
    (F) विभिन्न सामाजिक घटकों पर निगरानी रखना, और
    (G) सामाजिक उन्नयन के लिए प्रयत्नशील रहना।

    उपरोक्त आधार पर कहा जा सकता है कि संचार एक ऐसा वरदान है, जिसका उपयोग कर मानव ने अपने बौद्धिक कौशल को विकसित करने और अपने बुद्धि व परिश्रम के बल पर बेहतर जीवन बनाने का प्रयास किया है। इसीलिए मानव को अन्य जीवधारियों में श्रेष्ठ माना जाता है।

वेब पत्रकारिता

वेब पत्रकारिता 
वेब पत्रकारिताप्रकाशन और प्रसारण की भाषा में आधारभूत अंतर है। प्रसारण व वेब-पत्रकारिता की भाषा में कुछ समानताएं हैं। रेडियो/ टीवी प्रसारणों में भी साहित्यिक भाषा,जटिल व लंबे शब्दों से बचा जाता है। आप किसी प्रसारण में, 'हेतुप्रकाशनाधीनप्रकाशनार्थ,किंचितकदापियथोचित इत्यादिजैसे शब्दों का उपयोग नहीं पाएँगे।   कारण?  प्रसारण ऐसे शब्दों से बचने का प्रयास करते हैं जो उच्चारण की दृष्टि से असहज हों या जन-साधारण की समझ में न आएं। ठीक वैसे ही वेब-पत्रिकारिता की भाषा भी सहज-सरल होती है।
वेब का हिंदी पाठक-वर्ग आरंभिक दौर में अधिकतर ऐसे लोग थे जो वेब पर अपनी भाषा पढ़ना चाहते थेकुछ ऐसे लोग थे जो विदेशों में बसे हुए थे किंतु अपनी भाषा से जुड़े रहना चाहते थे या कुछ ऐसे लोग जिन्हें किंहीं कारणों से हिंदी सामग्री उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण वे किसी भी तरह की हिंदी सामग्री पढ़ने के लिए तैयार थे। आज परिस्थितिएं बदल गई हैं मुख्यधारा वाला मीडिया ऑनलाइन उपलब्ध है और पाठक के पास सामग्री चयनित करने का विकल्प है।
इंटरनेट का पाठक अधिकतर जल्दी में होता है और उसे बांधे रखने के लिए आपकी सामग्री पठनीयरूचिकर व आकर्षक हो यह बहुत आवश्यक है। यदि हम ऑनलाइन समाचार-पत्र की बात करें तो भाषा सरलछोटे वाक्य व पैराग्राफ भी अधिक लंबे नहीं होने चाहिए।
विशुद्ध साहित्यिक रुचि रखने वाले लोग भी अब वेब पाठक हैं और वे वेब पर लंबी कहानियां व साहित्य पढ़ते हैं। उनकी सुविधा को देखते हुए भविष्य में साहित्य डॉउनलोड करने का प्रावधान अधिक उपयोग किया जाएगा ऐसी प्रबल संभावना है।  साहित्य की वेबसाइटें स्तरीय साहित्य का प्रकाशन कर रही हैं और वे निःसंदेह साहित्यिक भाषा का उपयोग कर रही हैं लेकिन उनके पास ऐसा पाठक वर्ग तैयार हो चुका है जो साहित्यिक भाषा को वरियता देता है।
सामान्य वेबसाइट के पाठक जटिल शब्दों के प्रयोग व  साहित्यिक भाषा से दूर भागते हैं, वे आम बोल-चाल की भाषा अधिक पसंद करते हैं अन्यथा वे एक-आध मिनट ही साइट पर रूककर साइट से बाहर चले जाते हैं।
सामान्य पाठक-वर्ग को बाँधे रखने के लिए आवश्यक है कि साइट का रूप-रंग आकर्षक हो,छायाचित्र व ग्राफ्किस  अर्थपूर्ण होंवाक्य और पैराग्राफ़ छोटे होंभाषा सहज व सरल हो। भाषा खीचड़ी न हो लेकिन यदि उर्दू या अंग्रेज़ी के प्रचलित  शब्दों का उपयोग करना पड़े तो इसमें कोई बुरी बात न होगी। भाषा सहज होनी चाहिए शब्दों का ठूंसा जाना किसी भी लेखन को अप्रिय बना देता है।
इंटरनेट के प्रचार-प्रसार और निरंतर तकनीकी विकास ने एक ऐसी वेब मीडिया को जन्म दियाजहाँ अभिव्यक्ति के पाठ्यदृश्यश्रव्य एवं दृश्य-श्रव्य सभी रूपों का एक साथ क्षणमात्र में प्रसारण संभव हुआ। यह वेब मीडिया ही न्यू मीडिया’ हैजो एक कंपोजिट मीडिया हैजहाँ संपूर्ण और तत्काल अभिव्यक्ति संभव हैजहाँ एक शीर्षक अथवा विषय पर उपलब्ध सभी अभिव्यक्‍तियों की एक साथ जानकारी प्राप्त करना संभव हैजहाँ किसी अभिव्यक्ति पर तत्काल प्रतिक्रिया देना ही संभव नहींबल्कि उस अभिव्यक्ति को उस पर प्राप्त सभी प्रतिक्रियाओं के साथ एक जगह साथ-साथ देख पाना भी संभव है। इतना ही नहींयह मीडिया लोकतंत्र में नागरिकों के वोट के अधिकार के समान ही हरेक व्यक्ति की भागीदारी के लिए हर क्षण उपलब्ध और खुली हुई है।

http://2.bp.blogspot.com/--mNVfonicec/Vch9K4PFH8I/AAAAAAAABK4/n4f4DOyf7DQ/s320/online_journal.jpg
इंटरनेट पत्रकारिता के उपकरण-
वेब पत्रकारिता प्रिंट और इलेक्ट्रानिक माध्यम की पत्रकारिता से भिन्न है । वेब पत्रकारिता के लिए लेखन की समस्त दक्षता के साथ-साथ कंप्यूटर और इंटरनेट की बुनियादी ज्ञान के अलावा कुछ आवश्यक सॉफ्टवेयरों के संचालन में प्रवीणता भी आवश्यक है जैसेः-

1
। प्रिंटिग एवं पब्लिशिंग टूल्स - पेजमेकरक्वार्क एक्सप्रेसएमएमऑफिस आदि ।
2
। ग्राफिक टूल्स - कोरल ड्राएनिमेशनफ्लैशएडोब फोटोशॉप आदि ।
3
। सामग्री प्रबंधन टूल्स – एचटीएमएलफ्रंटपेजड्रीमवीवरजूमलाद्रुपललेन्यामेम्बू,प्लोनसिल्वास्लेसब्लॉगपोडकॉस्टयू ट्यूब आदि।
4
। मल्टीमीडिया टूल्स- विंडो मीडिया प्लेयररियल प्लेयरआदि ।
5
। अन्य टूल्स- ई-मेलिंगसर्च इंजनआरएसएस फीडविकि टेकनीकमैसेन्जरविडियो कांफ्रेसिंगचेंटिंगडिस्कशन फोरम ।

वेब पत्रकारिता में सामग्री
भारत के इंटरनेट समाचार पत्र मुख्यतः अपने मुद्रित संस्करणों की सामग्री यथा लिखित सामग्री और फोटो ही उपयोग लाते हैं। 

ऑनलाइन समाचार पत्रों का ले आउट मुद्रित संस्करणों की तरह नहीं होता है, मुद्रित संस्करणों की सामग्री कॉलमों में होती हैं । ऑनलाइन पत्र की सामग्री कई रूपो में होती हैं । इसमें एक मुख्य पृष्ठ होता है जो कंप्यूटर के मॉनीटर में प्रदर्शित होता है जहाँ विविध खंडों में सामग्री के मुख्य शीर्षक हुआ करते हैं । इसके अलावा प्रमुख समाचारों और मुख्य विज्ञापनों को भी मुख्य पृष्ठ में रखा जाता है जिन्हें क्लिक करने पर उस समाचारफोटोफीचरध्वनि या दृश्य का लिंक किया हुआ पृष्ठ खुलता है और तब पाठक उसे विस्तृत रूप में पढ़देख या सुन सकता है। समाचार सामग्री को वर्गीकृत करने वाले मुख्य शीर्षकों का समूह अधिकांशतः हर पृष्ठों में हुआ करते हैं । ये शीर्षक समाचारों के स्थान, प्रकृति इत्यादि के आधार पर हुआ करते हैं जैसे विश्व,देशक्षेत्रीयशहर अथवा राजनीतिसमाजखेलस्वास्थ्यमनोरंजनलोकरूचिप्रौद्योगिकी आदि। ये सभी अन्य पृष्ठ या वेबसाइट से लिंक्ड रहते हैं। इस तरह से एक पाठक केवल अपनी इच्छानुसार ही संबंधित सामग्री का उपयोग कर सकता है। पाठक एक ई-मेल या संबंधित साइट में ही उपलब्ध प्रतिक्रिया देने की तकनीकी सुविधा का उपयोग कर सकता है। वांछित विज्ञापन के बारे में विस्तृत जानकारी भी पाठक उसी समय जान सकता है जबकि एक मुद्रित संस्करण में यह असंभव होता है। इस तरह से ऑनलाइन संस्करणों में ऑनलाइन शापिंग का भी रास्ता है। मुद्रित संस्करणों में पृष्ठों की संख्या नियत और सीमित हुआ करती है जबकि ऑनलाइन संस्करणों में लेखन सामग्री और ग्राफिक्स की सीमा नहीं होती है। ऑनलाइन पत्रों की एक विशेषता यह भी है कि उसके पाठकों की संख्या यानी रीडरशिप उसी क्षण जानी जा सकती है ।

वेब-पत्रकारिता का सामान्य वर्गीकरण
इंटरनेट अब दूरस्थ पाठकों के लिए समाचार प्राप्ति का सबसे प्रमुख माध्यम बन चुका है। वर्तमान समय में इंटरनेट आधारित पत्र-पत्रिकाओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है । इसमें दैनिकसाप्ताहिकपाक्षिक,मासिकत्रैमासिक सभी तरह की आवृत्तियों वाले समाचार पत्र और पत्रिकाएं शामिल हैं ।


विषय वस्तु की दृष्टि से इन्हें हम समाचार प्रधानशैक्षिकराजनैतिकआर्थिक आदि केंद्रित मान सकते हैं। यद्यपि इंटरनेट पर ऑनलाइन सुविधा के कारण स्थानीयता का कोई मतलब नहीं रहा है किन्तु समाचारों की महत्ता और प्रांसगिकता के आधार पर वर्गीकरण करें तो ऑनलाइन पत्रकारिता को भी हम स्थानीयप्रादेशिकराष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर देख सकते हैं । जैसे नोएडा के ग्रेनो न्यूज डॉट कॉम  को स्थानीय, दैनिक छत्तीसगढ़ डॉट कॉम को प्रादेशिकनवभारत टाइम्स डॉट कॉम को राष्ट्रीय और बीबीसी डॉट कॉमडॉट काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन समाचार पत्र मान सकते हैं ।

ब जर्नलिज्‍म : नए जमाने के मीडिया को ऐसे समझें



प्रिंट और ब्रॉडकास्‍ट के बाद अब जमाना न्‍यू मीडिया का है। जवानी की ओर बढ़ रहे इस मीडिया ने नौजवानों को अपनी ओर खूब खींचा है।
न्‍यू मीडिया यानी क्‍या
परिभाषा के लिहाज से देखें तो न्‍यू मीडिया में वेबसाइट, ऑडियो-वीडियो स्‍ट्रीमिंग, चैट रूम, ऑनलाइन कम्‍युनिटीज के साथ तकनीक-ऑडियो-वीडियो-ग्राफिक के मेल से तैयार कोई भी कंटेंट शामिल है। लेकिन पत्रकारों के लिए न्‍यू मीडिया का मतलब ब्‍लॉगिंग, सिटिजन या ट्रेडिशनल जर्नलिज्‍म, सोशल नेटवर्किंग और वायरल मार्केटिंग (कंटेंट की) तक सीमित माना जा सकता है।
न्‍यू मीडिया की ताकत क्‍या
इंटरएक्टिविटी- आप रीडर तक खबर टेक्‍स्‍ट, साउंड, विजुअल, इंफोग्राफ किसी भी रूप में पहुंचा सकते हैं। यानी जिस भी आसान तरीके से रीडर उसे समझ सके। रीडर आपकी खबर पर फीडबैक भी दे सकता है। यानी दोतरफा संवाद, जो इस माध्‍यम की सबसे बड़ी ताकत है।
पोर्टेबिलिटी- डिजिटल डिवाइस के रूप में आसानी से साथ कैरी कर सकते हैं।
एवेलेविलिटी- कहीं भी, कभी भी उपलब्‍ध और सबसे बड़ी ताकत
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शायद सबसे बड़ी कमजोरी भी) यही है कि इसमें खबरों का एजेंडा न्‍यूजरूम में बैठे संपादक या पत्रकार तय नहीं करते। यह अधिकार यूजर्स (रीडर्स) के पास चला गया है।
ये ताकत है तो वेब जर्नलिस्‍ट क्‍या करे
इंटरएक्टिविटी- इंटरएक्टिव मीडियम है, इसलिए आर्टिकल से ज्‍यादा अप्‍लीकेशन पर दिमाग लगाना होगा, ताकि रीडर एंगेज हो सके।
पोर्टेबिलिटी- न्‍यू मीडिया तक पहुंच का जरिया आसानी से कैरी करने लायक डिवाइस हैं, इसलिए कंटेंट प्रेजेंटेशन में मोबाइल फोन यूजर्स की सुविधा का ध्‍यान रखना होगा। यानी आप आर्टिकल प्रेजेंट करने के लिए जो अप्‍लीकेशन यूज कर रहे हैं उसका रिफ्लेक्‍शन मोबाइल स्‍क्रीन पर आसानी से हो। एवेलेविलिटी- कहीं भी, कभी भी उपलब्‍ध है तो रियल टाइम इंफॉर्मेशन देनी होगी। घटना घटी नहीं कि तुरंत एक्‍शन में आना होगा और यूजर तक इसकी जानकारी पहुंचानी होगी। यानी रियल टाइम प्‍लानिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन।
और सबसे बड़ी बात
खबरों का एजेंडा तय करना जब पत्रकारों के हाथ में नहीं रहा तो फिर उन्‍हें ज्‍यादा से ज्‍यादा खबरें अपनी न्‍यूज वेबसाइट पर देनी होंगी, ताकि रीडर्स के पास ज्‍यादा से ज्‍यादा च्‍वॉइस हो।
कई बदलाव
न्‍यू मीडिया के चलते जर्नलिज्‍म में पॉजिटिव और निगेटिव, दोनों तरह के बदलाव आए हैं। पहले कुछ पॉजिटिव चेंज की बात-
पाठकों से संवाद- रीडर्स से तत्‍काल फीडबैक मिलता है और यह संवाद दोतरफा होता है।
खबरों की परिभाषा बदली- पारंपरिक मीडिया की तरह खबरों की परिभाषा और सीमा बदल गई। न्‍यू मीडिया में चूंकि रीडर अपनी पसंद से खबरें चुनता है, इसलिए प्रिंट या ट्रेडिशनल मीडिया की नजर में जो खबर नहीं है, न्‍यू मीडिया के लिए वह भी अहम खबर हो सकती है। न्‍यू मीडिया के पत्रकारों को अपने रीडर्स के लिए हर नेचर (यहां तक कि ह्यूमर भी) की ज्‍यादा से ज्‍यादा खबरें देनी होती हैं।
जनमानस को प्रभावित करने या बरगलाने की ताकत नहीं- ट्रेडिशनल मीडिया की साख ज्‍यादा है और सशक्‍त संवाद की सुविधा नहीं है, इसलिए वह जनमानस को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। पर न्‍यू मीडिया में ऐसी कोई ताकत अभी तक विकसित नहीं हुई है।
ये निगेटिव चेंज भी आए
गंभीरता की कमी, अफवाहों और गलत खबरों को बढ़ावा मिलने का खतरा, लेखकों/पत्रकारों में मर्यादा में रह कर लिखने की बाध्‍यता खत्‍म, खबरों को सनसनीखेज बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी, निजता का हनन ज्‍यादा, पत्रकारों की पहचान का संकट, क्‍योंकि न्‍यू मीडिया के लिए हर कोई लिख सकता है
वर्किंग
न्‍यू मीडिया के पत्रकारों का कामकाज मुख्‍यत: तीन चरणों में पूरा होता है
कंटेंट क्रिएशन प्रेजेंटेशन डिस्ट्रिब्‍यूशन
कंटेंट क्रिएशन
न्‍यू मीडिया की एक खास बात यह है कि यहां कंटेंट (या न्‍यूज) का एक अहम सोर्स यह मीडिया भी है। ट्विटर, रेड्डि‍ट.कॉम जैसी सोशल वेबसाइटें तो ट्रेडिशनल मीडिया को भी आज न्‍यूज मुहैया करा रही हैं।
वेब के लिए कॉपी
न्‍यूज वेबसाइट के लिए लिखी जाने वाली कॉपी में इस बात का खास ध्‍यान रखना होता है कि वह रीडर को एंगेज कर सके। रियल टाइम मीडियम होने के कारण यह बड़ी चुनौती है कि कॉपी बिना किसी गलती के लिखी जाए। वेब के लिए कॉपी लिखते समय इन बातों का ध्‍यान रखना चाहिए- वाक्‍य, पैराग्राफ और कॉपी छोटी हो। खबर का सार पहले सौ शब्‍दों में आ जाना चाहिए। जो लिख रहे हैं उसका संदर्भ पूरी तरह स्‍पष्‍ट होना चाहिए और स्‍पष्‍ट तरीके से लिखा गया होना चाहिए। हेडलाइन भ्रामक नहीं हो। यानी हेडलाइन में जो कह रहे हों, वह बात इंट्रो/कॉपी में जरूर होनी चाहिए।
हेडलाइन स्‍पष्‍ट हो और उसमें की-वर्ड्स (व्‍यक्ति, स्‍थान, पार्टी आदि का नाम, जिसके जरिए लोग उससे संबंधित खबर इंटरनेट पर सर्च करते हैं) का प्रयोग जरूर हो। जैसे- प्रधानमंत्री की जगह नरेंद्र मोदी लिखें, ‘चीन जाएंगे नरेंद्र मोदी, भारत से रिश्‍तों पर करेंगे बात।
हेडलाइन स्‍पेसिफिक हो, जेनरलाइज्‍ड नहीं। उदाहरण- बॉलीवुड के खान सुपरस्‍टार्स से मिले प्रधानमंत्री के बजाय यह हेडलाइन सटीक है कि सलमान, आमिर, शाहरुख से मिले नरेंद्र मोदी। लाखों, करोड़ों के बजाय 15 लाख या 50 करोड़ यानी सटीक नंबर का इस्‍तेमाल करें।
हेडलाइन में इनवर्टेड कौमा का इस्‍तेमाल नहीं करें।
विजुअल अपील के लिए स्‍टोरी से मैच करती तस्‍वीर लगाएं।
कंटेंट प्रेजेंटेशन
न्‍यूज वेबसाइट में कंटेंट का कम से कम समय में अच्‍छा से अच्‍छा प्रेजेंटेशन बड़ी चुनौती है और इसका रोल बेहद अहम है।
वेबसाइट पर अखबार की तरह लंबी कॉपी पढ़ना सुविधाजनक नहीं होता। इसलिए बेहतर प्रेजेंटेशन के लिए पहले लेवल पर तो कॉपी लिखने का पारंपरिक स्‍टाइल छोड़ना होता है।
सौ शब्‍दों के भीतर खबर का सार बता कर बाकी बातें सवाल-जवाब के रूप में बता सकते हैं। सवाल वे होंगे जो उस खबर को लेकर बतौर रीडर आपके मन में उठ रहे हों। जैसे- क्‍या हुआ, कब हुआ, क्‍यों हुआ, कैसे हुआ, जिम्‍मेदार कौन, अब आगे क्‍या हो सकता है, असर क्‍या होगा। जवाब भी बिल्‍कुल छोटे-छोटे वाक्‍यों में और नंबरिंग करके (1, 2, 3…) देने चाहिए।
किसी का कोट हो या कोई बात ज्‍यादा हाईलाइट किए जाने लायक हो तो उसे एक बॉक्‍स में दिखाया जा सकता है। यह सुविधाजनक तरीके से खबर प्रेजेंट करने का बेसिक तरीका है। अगले चरण में आप कंटेंट को ऑडियो, वीडियो, इंफोग्राफ, इंटरएक्टिव इंफोग्राफ, इलस्‍ट्रेशन आदि किसी भी तरीके से प्रेजेंट कर सकते हैं।
मल्‍टीमीडिया तकनीक के जरिए कहानी को बेहद प्रभावी ढंग से कहा जा सकता है।
कंटेंट डिस्ट्रिब्‍यूशन
वेब जर्नलिस्‍ट जो कंटेंट तैयार करता है उसे प्रेजेंट करने के साथ-साथ डिस्ट्रिब्‍यूट करने (रीडर्स तक पहुंचाने) में भी उसकी अहम भागीदारी होती है। वेब कंटेंट को डिस्‍ट्रीब्‍यूट करने का एक बड़ा जरिया सर्च इंजन (गूगल, बिंग, याहू आदि) और सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर, व्‍हाट्सएप, यूट्यूब आदि) है। इनके जरिए कंटेंट ज्‍यादा से ज्‍यादा रीडर्स तक पहुंच सके, यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्‍यान रखना चाहिए-
की-वर्ड्स: की-वर्ड्स वे शब्‍द हैं जिन्‍हें टाइप कर रीडर इंटरनेट पर किसी टॉपिक को सर्च करता है। वेबसाइट पर कंटेंट अपलोड करते वक्‍त इस बात का पूरा ख्‍याल रखना चाहिए कि उससे संबंधित सही और सटीक की-वर्ड्स भरे जाएं। इससे इंटरनेट पर सर्च करने वाले रीडर्स को आपकी खबर स्‍क्रीन पर पहले दिखने की संभावना बढ़ जाती है। इसे सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एसईओ) कहते हैं।
कुछ कीवर्ड तो सामान्‍य होते हैं, पर कुछ गूगल (सबसे बड़ा सर्च इंजन) और सोशल मीडिया पर ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों के इस्‍तेमाल के चलते ट्रेंड कर गए होते हैं। सामान्‍य की-वर्ड्स के अलावा इन ट्रेंडिंग की-वर्ड्स का इस्‍तेमाल जरूरी है। गूगल पर किसी टॉपिक से संबंधित सामान्‍य की-वर्ड टाइप करते ही उससे जुड़े ट्रेंडिंग की-वर्ड्स स्‍क्रीन पर दिखाई दे जाते हैं। वैसे ही सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग टॉपिक्‍स की लिस्‍ट फ्लैश होती है। इनका इस्‍तेमाल करने से कंटेंट ज्‍यादा से ज्‍यादा रीडर्स तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।
शेयरिंग: कंटेंट अपलोड करते ही उसे सोशल मीडिया पर शेयर करना जरूरी है। भारत में कंटेंट डिस्ट्रिब्‍यूशन के लिहाज से फेसबुक सोशल मीडिया का सबसे बड़ा प्‍लैटफॉर्म (वीडियो कंटेंट के लिए यूट्यूब) है। शेयरिंग के दौरान संबंधित हैशटैग और टैगिंग फीचर का इस्‍तेमाल करना फायदेमंद रहता है।
ब्‍लॉग, माइक्रोवेबसाइट्स, सोशल कम्‍युनिटीज आदि के जरिए भी कंटेंट को ज्‍यादा से ज्‍यादा रीडर्स तक पहुंचाया जा सकता है।
वेब एनालिटिक्‍ससबसे बड़ा टूल
वेब एनालिटिक्‍स: इसके बिना वेब जर्नलिस्‍ट अपना काम कर ही नहीं सकता। इसके जरिए उसे यह पता लगता है कि रीडर्स क्‍या और किस तरह का (मसलन, राजनीति में भी किस नेता या पार्टी के बारे में) कंटेंट पढ़ना चाहते हैं। वे आपकी वेबसाइट पर कितना एंगेज (एक बार साइट पर आने के बाद कितने पेज पढ़ रहे हैं) हो रहे हैं, कितना समय दे रहे हैं सब पता चलता है।
·         एनालिटिक्‍स के जरिए ये जानकारियां मिलती हैं-
·         कितने रीडर्स आ रहे हैं कहां से आ रहे हैं।
·         किस समय आ रहे हैं ।
·         क्‍या पढ़ रहे हैं।
·         कितनी देर पढ़ रहे हैं।
·         क्‍या उन्‍हें सबसे अच्‍छा लग रहा है।
·         वे क्‍या सबसे ज्‍यादा शेयर कर रहे हैं।
·         वे किस खबर के बारे में सबसे ज्‍यादा बात कर रहे हैं और भी बहुत कुछ

वेब एनालिटिक्‍स का जितना गहराई से अध्‍ययन करेंगे, रीडर्स की रुचि का उतना बारीक आकलन कर सकेंगे। इसके आधार पर आप अपनी कंटेंट स्‍ट्रैटजी तय कर सकते हैं। पर ध्‍यान रहे, यहां एक स्‍ट्रैटजी लंबे समय तक काम नहीं करती। कुछ सप्‍ताह भी नहीं। इसलिए रियल टाइम प्‍लानिंग की सबसे ज्‍यादा जरूरत है। न्‍यू मीडिया हर रोज बदलता है। कल इसका स्‍वरूप कैसा होगा, इसका अंदाजा आज नहीं लगाया जा सकता। पर एक बात तय है कि न्‍यू मीडिया काफी तेज रफ्तार से मजबूत हो रहा है और लगातार होगा।

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