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संदेश

संचार सिद्धांत और भारतीय दर्शन

संचार संबंधी भारतीय अवधारणा के बारे में जानना काफी रोचक और दिलचस्प होगा। आधुनिक संकल्पना में अन्तर्राष्ट्रीय संचार एवं संवाद की बात जोर-शोर से की जाती है, जो भारतीय चेतना और स्मृति में गहरे व्याप्त है। भारत में केवल अंतःवैयक्तिक संचार के कई ऐसे अनछुए पहलू हैं, जो मनुष्य की आंतरिक सक्रियता को सूक्ष्म और सूक्ष्मेतर ढंग से व्याख्यायित करती हैं। साहित्यकार निर्मल वर्मा के शब्दों में-‘‘गंगा महज एक नदी नहीं, हिमालय सिर्फ पहाड़ नहीं, वाराणसी और वृंदावन महज शहर नहीं हैं। मनुष्य का अतीत संग्रहालयों में बंद नहीं है, न ही उसके देवता यूनानी देवताओं की तरह पौराणिक काल के स्मृति-चिन्ह्र हैं। मिथक और यथार्थ, पौराणिक स्मृति और वर्तमान जीवन, देवता और मनुष्य आज भी एक साथ रहते हैं। सैकड़ों विश्वासों, आस्थाओं, समृतियों और संस्कारों का यह संगम और पारस्परिक संपर्क-संवाद केवल भारतीय संस्कृति में ही संभव हो सकता था-जिसमें संपूर्ण मनुष्य की परिकल्पना निहित रहती है।’’यह बात विशेष उल्लेखनीय है कि भारतीय मानस संचार की अंतः-प्रेरणा को सिर्फ अपने भीतर समेटे रखने का आदी नहीं है। यहां विचारों, अनुभवों और जानकारियों का…
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किस्सा-ए-ईमानदारी

लेखक :-शिवेंदु राय  प्रधानमंत्री मोदी अगर ईमानदार हैं तो उनसे कैसे निबटा जाए, यह आजकल की सबसे ज्वलंत समस्या है | तथाकथित राजनीति विज्ञान के विद्वान इस दिशा में पोथियाँ तैयार करने में लगे हैं | सभी राजनीतिक पार्टियों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि मोदी की ईमानदारी अब विकराल रूप ले चुकी है |  इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि सभी पार्टियाँ इस सामयिक समस्या पर मिल बैठ कर विचार करे | ईमानदारी के विरुद्ध मैं भी चिंतन करने को तैयार हूँ | ये जानते हुये भी कि चिन्तन का विषय मैंने नहीं निर्धारित किया है, मेरे अपने फायदे या नुकसान से जुड़ा मसला नहीं है | पहली कड़ी में आदत के विरुद्ध कजरौटे से दुश्मनी कैसे संभव है भाई | आज तक काजल की कोठरी में बैठने की आदत थी, अब काजल से परहेज हजम कैसे होगा | अगर मैं कहूँ कि प्रधानमंत्री अगर ईमानदारी के संत-ब्रांड है तो उनके विरोधी, चेलों की कला के बारे में लिखा गया चालीसा शुरू कर देंगे | और उनके चेले उस ईमानदारी को लछेदार शब्दों में बेवजह प्रतिभा का परिचय देते हुए नृत्य करने लगेंगे | जिसकी कोई जरुरत नहीं थी | अब ईमानदारी गई तेल लेने चर्चा शुरू होगी नृत्य पर | दूसरी …

किस्सा-ए-अवैध रिश्ता

कॉमरेड, डेढ़ साल से देश की तरह मेरे गाँव में भी बड़ी चकचक मची हुई है, शोर हुआ है और लोग यहां-वहां गाँव के लिए तथाकथित सार्थक बहस करते पाए गए हैं | जब से मोदी प्रधानमंत्री बने हैं मेरे गाँव के सभी गेटकीपर वैज्ञानिक विधि से बातचीत करने लगे हैं | परन्तु इस घटना का एक अच्छा असर यह हुआ है कि देश की तरह मेरे गाँव के लोगों को भी काम मिल गया है | जो फालतू बैठे थे, वे शोर करने लगे है ,संपादक के नाम पत्र भी लिखने लगे है | नहर की पुलिया पर बैठ के मूडीज जैसी संस्थाओं की समीक्षा करने लगे हैं | आज तक जिनका अवैध संबंध भी नहीं था राजनीति से वो तकनिकी पहलुओं पर बतियाने लगे हैं | भाई अपने देश में परम्परा रही है बतियाने की, ज्वलंत प्रश्न है मोदी सरकार, शहर के लोग ही समीक्षा कर सकते है क्या? गाँव का भी तो हक़ बनता है ?  राजेन्द्र जी का लड़का जहाज में सफ़र कर रहा है चाचा ! अरे भाई क्यूँ न करे पीएचडी कर रहा है सरकारी वजीफा जो मिल रहा है | मेरा भी तो लड़का कर रहा है उसको तो नहीं मिलता जहाज लायक वजीफा | साला, जब देखो मेरे से ही मांगता रहता है पापा ये, पापा वो | भाई तुम पीएचडी करा रहे हो अपने लौंडे को कोई साधारण बा…

किस्सा-ए-कम्युनिस्ट

कम्यूनिज्म तथा कम्यूनिस्टों के बारे में मुझे सबसे पहले अपने गाँव जमुआंव से ही पता चला था | उस दौर में भूमिहारों के घर कांग्रेसी या भाजपाई पैदा होते थे, डर के मारे कुछ लोग या यूँ कह सकते है कि ब्राह्मणों के चक्कर में भी राष्ट्रीय जनता दल यानि लालू जी के पाले में अवतरित हो जाते थे | हमारे टोले में कोई उतना पढ़ा लिखा नहीं था जो क्रांति की बात करता ,सब के सब सरकारी नौकर थे ,सत्ता के गुलाम लोगों का टोला था | गाँव में पक्के रूप में कहा जाये तो एक ही कॉमरेड थे ,सबको लाल सलाम कहते फिरते थे ,गाँव के चौक पर जय प्रकाश भाई का घर था | जब हम बच्चें लोग उनसे पूछते थे कि लाल सलाम का क्या मतलब है तो अक्सर बोल कर भगा देते थे कि तुम लोगों के समझ से बहार की चीज है | जब मैं छठी क्लास में पहुंचा तब दोस्तों के साथ हिम्मत जुटा कर उनसे पूछ बैठा, चक्कर क्या है कॉमरेड और लाल सलाम का ? पहले तो बोलने को तैयार नहीं थे बहुत ज़िद के बाद तैयार हुए, रिक्वेस्ट भी किया कि जो भी बोलूँगा हँसना नहीं है कॉमरेड तुम लोगों को, ध्यान से सुनना और जवाब देना है | बोलना शुरू किया ,जब कामरेडों की सरकार होगी तब सब कुछ हम लोगों के हाथ म…

वर्तमान समय में ई बुक्स की उपयोगिता का अध्ययन

प्रस्तावना कहते हैं कि किताबें ही आदमी की सच्ची दोस्त होती हैं, जमाना बदल रहा है ..लोगों के पास समय की कमी होती जा रही है | किताबों को पढने का भी तरीका परिवर्तित हुआ है | अब जमाना डिजिटल है तो किताबें भी डिजिटल हुईं | ई-पुस्तक(इलैक्ट्रॉनिक पुस्तक) का अर्थ है डिजिटल रुप में पुस्तक । ई-पुस्तकेंकागजकी बजाय डिजिटल संचिका के रुप में होती हैं जिन्हेंकम्प्यूटर,मोबाइलएवं अन्य डिजिटल यंत्रों पर पढ़ा जा सकता है । इन्हेंइण्टरनेटपर भी छापा, बांटा या पढ़ा जा सकता है ।ये पुस्तकें कई फाइल फॉर्मेट में होती हैं जिनमें पीडीऍफ (पोर्टेबल डॉक्यूमेण्ट फॉर्मेट), ऍक्सपीऍस आदि शामिल हैं, इनमें पीडीऍफ सर्वाधिक प्रचलित फॉर्मेट है ।ई-पुस्तको को पढ़ने के लिए कम्प्यूटर (अथवा मोबाइल) पर एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है जिसे ई-पुस्तक पाठक(eBook Reader) कहते हैं । पीडीऍफ ई-पुस्तकों के लिएऍडॉब रीडरतथाफॉक्सिट रीडरनामक दो प्रसिद्ध पाठक हैं ।ई-बुक के सस्ता होने का कारण यह है कि इन पर पहली बार आने वाली लागत के बाद अमूमन कोई लागत नहीं आती । एक बार ई-बुक विकसित और प्रकाशित होने के बाद लेखक उसकी अनंत फाइलें बनाने के लिए स्वतं…

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में मूल्यपरकता की आवश्यकता

हम धर्म और शिक्षा को चरित्र-निर्माण का सीधा मार्ग और सांसारिक सुख का सच्चा द्वार समझते हैं | हम देश-भक्ति को सर्वोत्तम शक्ति मानते हैं जो मनुष्य को उच्चकोटि की निःस्वार्थ सेवा करने कीओर प्रवृत्त करती है।
- मालवीय जी सीखने का अर्थ कुछ आंकड़ों और तथ्यों को याद कर लेना भर नहीं होता है, बल्कि उससे कहीं अधिक व्यापक होता है | जब किसी का ज्ञान जीवन के गहरे अंतर्ज्ञान में बदल जाए, तभी हम कह सकते हैं कि उसे सही अर्थों में शिक्षा मिली है | मूल्य आधारित शिक्षा उतनी ही पुरानी है जितना कि मानव सभ्यता | भारत में शिक्षा वैदिक युग से लेकर आज तक शिक्षा प्रकाश का श्रोत है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमारा सच्चा पथ-प्रदर्शन करती है | आज संसार में अनेक देश है और प्रत्येक राष्ट्र की अपनी एक विशिष्टता है, यह विशिष्टता उस देश के लोगों द्वारा निर्मित्त है | क्योंकि कोई भी देश वहाँ बसे व्यक्तियों से बना है, जिस प्रकार एक-एक ईंट से मकान बनता है, और यह ईंट जितनी मजबूत होगी मकान उतना ही मजबूत होगा | उसी प्रकार जब तक एक-एक व्यक्ति शिक्षित नहीं होगे |वह देश मजबूत कैसे होगा? क्योंकि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो एक …